Stories & narrationWoh Wala Bachpan90s में स्कूल का पहला दिन | सांड से बचने की मजेदार कहानी | Part-2 | Childhood Story | Ghibli Style

90s में स्कूल का पहला दिन | सांड से बचने की मजेदार कहानी | Part-2 | Childhood Story | Ghibli Style

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Published Sep 2, 2026, 10:45 AM · 6w ago

Woh Wala Bachpan
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90s में स्कूल का पहला दिन | सांड से बचने की मजेदार कहानी | Emotional Childhood Story | Ghibli Style Part-2 रात भर हुई तेज़ बारिश के बाद सुबह रोहन, रिंकी, राहुल और चिंकी एक ही कमरे में रात बिताने के बाद उठते हैं। बारिश रुक चुकी होती है, लेकिन बच्चों के सामने एक और दिलचस्प बात होती है—कल रात दादा जी के पुराने खत में बताए गए बरगद के राज़ का पता लगाना। घर से निकलने से पहले चारों बच्चे उस रहस्य को लेकर आपस में बातें करते हैं। लेकिन आज गाँव में मेला भी लगने वाला है और स्कूल जाना भी जरूरी है। रोहन छुट्टी की उम्मीद करता है, लेकिन माँ उसे स्कूल जाने के लिए कहती हैं। दादा जी बीच में रास्ता निकालते हैं कि बच्चे स्कूल जाएँ और एक बजे तक छुट्टी लेकर वापस आ जाएँ। रास्ते में राहुल और चिंकी पहले से तैयार मिलते हैं। चारों बच्चे बारिश के बाद कीचड़ और पानी से भरी गाँव की गलियों में उछल-कूद करते हुए स्कूल पहुँचते हैं। स्कूल में रोहन और उसके दोस्त मास्टर जी से जल्दी छुट्टी माँगते हैं, लेकिन मास्टर जी आसानी से मानने वाले नहीं होते। आखिर बच्चों की मासूम बातों और जलेबी के लालच के बीच मास्टर जी एक शर्त पर छुट्टी दे देते हैं—अगले दिन दुगना होमवर्क पूरा करना होगा। एक बजे छुट्टी होने के बाद चारों बच्चे मेले की ओर निकलते हैं। रास्ते में उन्हें वही रास्ता दिखाई देता है जहाँ पहले सांड ने उनका पीछा किया था। डरते-डरते वे आगे बढ़ते हैं, लेकिन कुछ ही देर में दूर से मेले की रंग-बिरंगी झंडियाँ, झूले और मिठाई की दुकानों की आवाज़ें सुनाई देने लगती हैं। मेले में दादा-दादी बरगद के पेड़ के पास अपना हलवाई स्टॉल लगाते हैं और लड्डू बेचने की तैयारी करते हैं। बच्चे झूले पर मस्ती करने लगते हैं, लेकिन तभी अचानक वही मोटा सांड मेले के बीच आ जाता है। अफरा-तफरी मच जाती है और लोग इधर-उधर भागने लगते हैं। तभी भीड़ के बीच से कालू भैया आगे आते हैं। पास के शहर के सर्कस में जानवरों को संभालने वाले कालू भैया अपने अनुभव और हिम्मत से सांड को काबू कर लेते हैं। कुछ देर की मशक्कत के बाद मेला फिर शांत हो जाता है और पूरा गाँव कालू भैया की तारीफ करता है। हलचल शांत होने के बाद बच्चों का ध्यान फिर बरगद के पुराने रहस्य की तरफ जाता है। दादा जी बरगद की जड़ों के पास मिट्टी हटाते हैं और वहाँ से एक छोटी पीतल की संदूकची निकालते हैं। अंद
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Details

Published
Sep 2, 2026, 10:45 AM
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10:17 (617 s)
Format
Long-form
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Audio language
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Quality
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Captions
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Made for kids
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Licensed content
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Video ID
BLAeuzPycLs

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