Stories & narrationSuvYrMumkin Hai Bacha Le Koi Mujhi Se Mujhe || Heart Touching Ghazal Song || Jagjit Singh

Mumkin Hai Bacha Le Koi Mujhi Se Mujhe || Heart Touching Ghazal Song || Jagjit Singh

Long-form6:03EntertainmentPublished Sep 25, 2026, 2:03 PM · 4w ago
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Description

मुमकिन है बचा ले कोई मुझी से मुझे गले लगा ले कोई, बेहिसाब ख़ुशी से मुझे, और क्या चाहिए ज़िंदगी से मुझे। बस एक पल के लिए साथ बिठा ले अपने, मुमकिन है बचा ले कोई मुझी से मुझे। बहुत थक गया हूँ मैं दुनिया को समझाते-समझाते, कोई समझ ले बस मेरी ख़ामोशी से मुझे। सबके सामने हँसता हूँ, ठीक हूँ कहता हूँ, कोई पूछे तो सही मेरी उदासी से मुझे। गले लगा ले कोई, बेहिसाब ख़ुशी से मुझे, और क्या चाहिए ज़िंदगी से मुझे। मैंने हर दर्द को सीने में छुपा रखा है, किसी को क्या बताऊँ अपनी कहानी से मुझे। लोग कहते हैं कि वक़्त सब ठीक कर देता है, वक़्त ही तो रोज़ मिलाता है मेरी तन्हाई से मुझे। कभी-कभी ख़ुद से ही भागने लगता हूँ मैं, कोई रोक ले मेरी इस आवारगी से मुझे। मैं बुरा नहीं हूँ, बस थक गया हूँ थोड़ा, कोई फिर से मिला दे मेरी ही सादगी से मुझे। मेरी आँखों में जो ठहरा हुआ पानी है, उसका मतलब न पूछो मेरी ख़ामोशी से मुझे। कुछ सपने थे जिन्हें रास्ते में छोड़ आया, कोई वापस बुला ले मेरी ही ज़िंदगी से मुझे। बहुत लोगों के लिए जीता रहा उम्र भर, कोई एक बार जीने दे मेरी ख़ुशी से मुझे। मैंने सबको दिया अपना वक़्त, अपना दिल, कोई थोड़ी-सी मोहलत दे मेरी कमी से मुझे। गले लगा ले कोई, बेहिसाब ख़ुशी से मुझे, और क्या चाहिए ज़िंदगी से मुझे। बस एक पल के लिए साथ बिठा ले अपने, मुमकिन है बचा ले कोई मुझी से मुझे। मैंने रिश्तों को बहुत संभालकर रखा था, फिर भी खोता गया हर किसी को धीरे-धीरे। कुछ लोग पास होकर भी दूर निकल गए, कुछ दूर होकर भी मिलते रहे यादों में धीरे-धीरे। अब किसी से कोई शिकायत भी नहीं है, बस कोई निकाल दे इस ख़ामोशी से मुझे। मेरे अंदर अभी थोड़ा-सा बच्चा ज़िंदा है, कोई फिर से मिला दे उसकी हँसी से मुझे। कभी माँ की गोद याद आती है अचानक, कभी घर की वो पुरानी-सी गली बुलाती है। शहर की भीड़ में सब अपने लगते हैं, फिर भी एक अजीब-सी तन्हाई सताती है। काश कोई बिना पूछे समझ जाए, क्यों डर लगता है कभी-कभी ख़ुद से मुझे। काश कोई कह दे—“अब कहीं जाने की ज़रूरत नहीं,” और थाम ले उम्र भर अपनी बाँहों से मुझे। मैंने ख़ुद को बहुत मज़बूत बना लिया शायद, इसीलिए कोई मेरा दर्द देख नहीं पाता। जो हर किसी के आँसू पोंछता रहा उम्र भर, वो अपना रोना किसी को कह नहीं पाता। आज दिल चाहता है बस इतना-सा कोई करे, कुछ देर बैठकर सुने मेरी ख़ामोशी को मुझे। न कोई सवाल हो, न कोई जवाब माँगे, बस अपना समझकर रख ले अपनी ज़िंदगी में मुझे। अंतिम शेर अब और कुछ नहीं चाहिए दुनिया से मुझे, न दौलत, न शोहरत, न कोई नाम चाहिए। बस जब टूटने लगूँ अपने ही भीतर कहीं, कोई कह दे—“मैं हूँ, तू अकेला नहीं।” गले लगा ले कोई, बेहिसाब ख़ुशी से मुझे, और क्या चाहिए ज़िंदगी से मुझे। बस एक पल के लिए साथ बिठा ले अपने, मुमकिन है बचा ले कोई मुझी से मुझे।

Details

Published
Sep 25, 2026, 2:03 PM
Length
6:03 (363 s)
Format
Long-form
Category
Entertainment
Audio language
HI
Quality
HD
Captions
No
Made for kids
No
Licensed content
Yes
Video ID
PaGnwP0z9q8

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