Stories & narrationSocrates-o1rचाचा ने छीनी पिता की फैक्ट्री, सड़क किनारे हिसाब बनाने वाली बेटी ने ऐसे वापस पाया अपना हक!
चाचा ने छीनी पिता की फैक्ट्री, सड़क किनारे हिसाब बनाने वाली बेटी ने ऐसे वापस पाया अपना हक!
Long-form55:29People & BlogsPublished Oct 11, 2026, 5:23 PM · 1w ago
Views
288,440
+112 views/hour
Views / hour now
112
measured 9h ago
Peak views / hour
112
9h ago
First 24 hours
—
not tracked from upload
Engagement
—
likes + comments / views
Likes
—
hidden
Comments
23
0.01% of views
Est. ad revenue
$577–$1,731
lifetime, $2–6 RPM
Checked every 12 h while the video is this age · last check 9h ago · next in 157 min. YouTube itself updates public counts with a short delay.
Avg views / day
32.9K
since upload
vs channel median
0.1×
this video's views ÷ the channel's usual
Rank in channel
#11
of 12 tracked
Views over time
1 readings
Total views Views gained per hour
Live tracking started
The chart fills in as FameX records new readings.
Description
एक पिता ने जिंदगी भर मेहनत करके फैक्ट्री बनाई, लेकिन उसकी मौत के बाद जिन रिश्तेदारों पर सबसे ज्यादा भरोसा था, उन्हीं ने उसकी इकलौती बेटी से घर और कारोबार छीन लिया। कभी लाखों रुपये के ऑर्डर सँभालने वाली पढ़ी-लिखी बेटी सड़क किनारे बैठकर पचास-पचास रुपये के लिए काम करने को मजबूर हो गई। लेकिन उसकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने सब कुछ बदल दिया।
यह कहानी है 27 साल की निदा की, जिसके पिता रफ़ीक़ साहब एक यूनिफॉर्म फैक्ट्री के मालिक थे। उन्होंने अपनी मेहनत से कारोबार खड़ा किया था और चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर उसे आगे बढ़ाए।
लेकिन रफ़ीक़ साहब की बिगड़ती सेहत और अचानक निधन के बाद सब कुछ बदल जाता है।
रफ़ीक़ साहब जिस रिश्तेदार शाहिद को अपने छोटे भाई जैसा मानते थे, वही अपनी पत्नी नाज़िया के साथ मिलकर फैक्ट्री के हिसाब में गड़बड़ियाँ करने लगता है। स्कूलों से मिले भुगतान छिपाए जाते हैं, सामान दूसरे गोदामों में भेजा जाता है और नाज़िया की सप्लाई एजेंसी के नाम पर फर्जी बकाये दिखाए जाते हैं।
आखिरकार शाहिद झूठे कर्ज के सहारे फैक्ट्री पर कब्जा कर लेता है। निदा को अपनी ही फैक्ट्री में प्रवेश करने से रोक दिया जाता है और उसे घर से भी निकाल दिया जाता है।
निदा नौकरी की तलाश में कई दफ्तरों के चक्कर लगाती है, लेकिन कहीं अनुभव तो कहीं प्रमाणपत्र के कारण उसे काम नहीं मिलता। मजबूर होकर वह बस अड्डे के पास सड़क किनारे लोगों के आवेदन लिखने और हिसाब-किताब बनाने लगती है।
एक दिन राशिद नाम का कर्मचारी कुछ बिल लेकर उसके पास आता है। निदा उन बिलों में ऐसी गलती पकड़ती है, जिसे दूसरे कर्मचारी नहीं समझ पाए थे।
यहीं उसकी मुलाकात वितरण कंपनी चलाने वाले साहिल से होती है।
साहिल निदा को अपनी कंपनी में काबिलियत साबित करने का मौका देता है। निदा पुराने बिलों और गोदाम के रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी पकड़कर कंपनी की समस्या सुलझाती है और अपनी मेहनत से स्थायी नौकरी हासिल कर लेती है।
लेकिन निदा अपने पिता के साथ हुए अन्याय को नहीं भूलती।
जब उसे पता चलता है कि शाहिद फैक्ट्री की मशीनें बेचने की तैयारी कर रहा है, तो वह वकील सुमन की मदद से कानूनी लड़ाई शुरू करती है।
पुराने स्कूलों के भुगतान रिकॉर्ड, माल पहुँचाने वाले करीम की रसीदें, कर्मचारी रुख़साना का गुप्त रखा हुआ पुराना रजिस्टर और अदालत के आदेश पर मिले बैंक दस्तावेज़ धीरे-धीरे शाहिद और नाज़िया की सच्चाई सामने लाने लगते हैं।
सबूतों से पता चलता है कि फैक्ट्री के पैसे नाज़िया ट्रेडर्स को भेजे गए थे और सामान के वास्तविक हिसाब में गंभीर गड़बड़ियाँ थीं।
अदालत पहले मशीनों की बिक्री पर रोक लगाती है। बाद में विस्तृत सुनवाई और दस्तावेज़ों की जाँच के बाद निदा के वैध अधिकार को मान्यता देते हुए फैक्ट्री और घर का कब्जा वापस दिलाने का आदेश देती है। वित्तीय अनियमितताओं की अलग जाँच भी शुरू होती है।
कई महीनों के संघर्ष के बाद निदा अपने पिता की फैक्ट्री में लौटती है।
वह बंद मशीनों की मरम्मत करवाती है, पुराने कर्मचारियों को वापस बुलाती है और उनके बकाया वेतन चुकाने की जिम्मेदारी उठाती है। धीरे-धीरे फैक्ट्री में फिर से यूनिफॉर्म बनने लगती हैं।
इस पूरे सफर में साहिल और निदा के बीच भरोसा, सम्मान और लगाव बढ़ता है। आखिरकार दोनों शादी करके नई जिंदगी शुरू करते हैं।
यह एक भावनात्मक पारिवारिक कहानी है, जिसमें रिश्तेदारों का विश्वासघात, संपत्ति पर कब्जा, एक बेटी का संघर्ष, शिक्षा की ताकत, आत्मसम्मान, कानूनी लड़ाई, न्याय और सच्चे रिश्तों की अहमियत दिखाई गई है।
निदा की कहानी हमें याद दिलाती है कि मुश्किल परिस्थितियाँ इंसान से उसका घर, कारोबार और सहारा छीन सकती हैं, लेकिन उसकी शिक्षा, मेहनत, ईमानदारी और हिम्मत उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा कर सकती हैं।
अगर आपको संघर्ष, पारिवारिक रिश्तों, इंसाफ और जिंदगी में दोबारा शुरुआत करने वाली ऐसी भावनात्मक हिंदी कहानियाँ पसंद हैं, तो वीडियो को लाइक करें और कमेंट में बताइए कि निदा के संघर्ष का कौन-सा हिस्सा आपको सबसे ज्यादा प्रभावित कर गया।
#HindiStory #EmotionalStory #MoralStory #FamilyStory #HindiKahani #StruggleStory #MotivationalStory
Details
- Published
- Oct 11, 2026, 5:23 PM
- Length
- 55:29 (3,329 s)
- Format
- Long-form
- Category
- People & Blogs
- Audio language
- HI
- Quality
- HD
- Captions
- No
- Made for kids
- No
- Licensed content
- Yes
- Video ID
- WKPDoRculFE
More from Socrates-o1r
राजकुमारी ने पानी माँगने वाली स्त्री को दी सज़ा, फिर एक अजनबी ने खोल दिया सदियों पुराना रहस्य!619K views · 2d ago · +10K/h
मजदूर समझकर मालिक को किया बेइज्जत, गरीब कलाकार की नौकरी छीनना पड़ा भारी!45.9K views · 4d ago · +26/h
भूखी महिला को रोटी दी तो राजा ने बेटी को महल से निकाला, फिर हुआ अनोखा चमत्कार!1.7M views · 1w ago · +1K/h
जिस पत्नी को वह अपने लायक नहीं समझता था, ८ साल बाद उसी के सामने नौकरी के लिए खड़ा था470K views · 1w ago · +71/h
जिस पत्नी को अनपढ़ कहकर घर से निकाला, सालों बाद उसी के सामने भिखारी बना मिला पति | Emotional Story2.4M views · 1w ago · +3.4K/h
जिस लड़की की शादी भिखारी से कर दी, वही बन गई IAS अधिकारी | Emotional Hindi Story2.4M views · 2w ago · +312/h
सौतेली माँ ने किताबें जलाईं, गरीब मजदूर से शादी कराई—फिर भी बेटी बनी IAS अफसर2.7M views · 2w ago · +2.3K/h
जिस “पागल भिखारी” से नंदिनी की जबरन शादी हुई, वही निकला करोड़ों की कंपनी का मालिक8.4M views · 3w ago · +20.4K/h
Statistics from the YouTube Data API, tracked by FameX. Views per hour, revenue and comparisons are FameX estimates.