Stories & narrationSuvYr IIMere Hisse Ki Khushi Kaun Le Gaya | मेरे हिस्से की ख़ुशी कौन ले गया | Jagjit Singh Ghazals

Mere Hisse Ki Khushi Kaun Le Gaya | मेरे हिस्से की ख़ुशी कौन ले गया | Jagjit Singh Ghazals

Long-form6:15MusicPublished Oct 19, 2026, 9:34 AM · 4d ago
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Description

मेरे हिस्से की ख़ुशी कौन ले गया मैं हँसता रहा, मेरा दिल रो पड़ा, मेरे साथ ये हादसा कौन कर गया। जिन्हें अपनी दुनिया बनाया था मैंने, वही पूछते हैं, तू हमारा कौन था। मुखड़ा मेरे हिस्से की ख़ुशी कौन ले गया, मेरी आँखों से नींदें चुरा कौन गया। मैं तो सबके लिए जीता रहा उम्र भर, मेरे लिए मगर दुआ कौन कर गया। अंतरा 1 — माँ-बाप की याद वो माँ की दुआएँ, वो बाबूजी का घर, वो छोटी-सी छत और वो मिट्टी का दर। मैं रोटी कमाने शहर आ तो गया, मगर छोड़ आया वहीं अपना दिल। अब त्योहार आते हैं, घर याद आता है, माँ का वो चेहरा बहुत याद आता है। जो कहती थी, बेटा, तू खाना तो खा, अब पूछने वाला कोई भी नहीं है। अंतरा 2 — अधूरी मोहब्बत तेरे बाद किसी से मोहब्बत न की, ख़ुद से भी पहले-सी शिकायत न की। तेरी तस्वीर रखी है किताबों में अब, मगर खोलने की कभी हिम्मत न की। तूने कहा था कि लौटूँगी एक दिन, मैंने हर आहट पे दरवाज़ा खोला। तेरे आने की उम्मीद में जानेमन, कितनी रातों को मैंने सवेरा न होने दिया। मुखड़ा दोहराएँ मेरे हिस्से की ख़ुशी कौन ले गया, मेरी आँखों से नींदें चुरा कौन गया। अंतरा 3 — ज़िंदगी की सच्चाई बचपन में लगता था, बड़े होंगे हम, तो अपने ही सपनों के घर होंगे हम। बड़े हो गए तो ये मालूम हुआ, किसी की ज़रूरत, किसी का सफ़र होंगे हम। कमाते रहे ताकि घर मुस्कुराए, ख़ुद अपने ही चेहरे से हँसी खो गई। सबकी ज़रूरत का सामान बनते-बनते, न जाने हमारी ज़रूरत कहाँ खो गई। आख़िरी शेर — बहुत धीमे सुर में कभी वक़्त मिले तो मेरे पास आना, मुझे भी ज़रा मेरा हाल सुनाना। मैं वो शख़्स हूँ जो सबको हँसाता रहा, कभी मेरे साथ बैठकर आँसू बहाना। मैं हँसता रहा, मेरा दिल रो पड़ा… कोई पूछता भी नहीं, मैं कहाँ खो गया। मेरे हिस्से की ख़ुशी कौन ले गया… मेरे जीने का मतलब कहाँ खो गया…

Details

Published
Oct 19, 2026, 9:34 AM
Length
6:15 (375 s)
Format
Long-form
Category
Music
Audio language
HI
Quality
HD
Captions
No
Made for kids
No
Licensed content
Yes
Video ID
i1n_kLy2rfg

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