Stories & narrationSuvYr IIछोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते | Unchai Par Udane Wale Pankshi | Jagjit Singh Gazal
छोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते | Unchai Par Udane Wale Pankshi | Jagjit Singh Gazal
Long-form6:31MusicPublished Sep 24, 2026, 10:09 AM · 4w ago
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Description
ऊँचाई पर उड़ने वाले पंछी,
छोटे-छोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते।
जिन्होंने देख लिया हो खुला आसमान,
वो बंद खिड़कियों में फिर दिल नहीं लगात
https://youtu.be/DCf-3I0X6DI?si=XfGs_d8kE15YJ3yt
https://youtu.be/955ayn1ce1k?si=0DUAMaF2-j_mNssW
https://youtu.be/Vz1tSMe1wO8?si=pEld1Ta0iHMHjO8k
मुखड़ा
ऊँचाई पर उड़ने वाले पंछी,
छोटे-छोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते,
जिन्हें आदत हो गई हो हवाओं की,
वो हर किसी के सहारे पर दिल नहीं लगाते।
जिन्होंने रातों में तारों से बातें की हों,
वो दिन के उजालों से बहलते नहीं,
जिन्होंने छुआ हो कभी बादलों को,
वो ज़मीन की हदों में ठहरते नहीं।
उन्हें मंज़िल से ज़्यादा सफ़र प्यारा है,
वो हर रास्ते को घर नहीं बनाते,
ऊँचाई पर उड़ने वाले पंछी,
छोटे-छोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते।
कुछ लोग समझते हैं हम बदल गए हैं,
उन्हें क्या पता हम निकल गए हैं,
जो कल तक थे अपने, वो पीछे रह गए,
हम अपने ही साए से आगे निकल गए हैं।
हर रिश्ता उम्र भर का हो—ज़रूरी तो नहीं,
हर हाथ को अपना हाथ नहीं बनाते,
जिन्हें उड़ने की आदत हो जाए एक बार,
वो हर डाल पर आशियाँ नहीं बनाते।
कभी हमने भी छोटी-सी छत चाही थी,
किसी की आँखों में अपनी दुनिया चाही थी,
मगर दिल में कुछ दूर तक जाने की चाह थी,
और सामने पूरी दुनिया पड़ी थी।
हम ठहरे तो ख़ुद से ही हार जाते,
इसलिए किसी एक किनारे पर ठहरे नहीं,
ऊँचाई पर उड़ने वाले पंछी,
छोटे-छोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते।
कुछ शाखें बहुत खूबसूरत थीं,
कुछ फूलों में बड़ी मोहब्बत थी,
मगर शाख़ से बँधकर रह जाते अगर,
तो उड़ने की कहाँ फिर हिम्मत थी।
जिसे आसमान ने आवाज़ दी हो,
वो ज़मीन की ज़ंजीरें नहीं मानते,
जिन्हें ख़्वाब बड़े मिल जाएँ,
वो छोटे समझौतों में उम्र नहीं बिताते।
मगर उड़ने का भी अपना दर्द है,
हर ऊँचाई के नीचे एक तन्हाई है,
जो सबसे ऊपर दिखाई देता है,
उसके हिस्से में सबसे ज़्यादा हवा आई है।
नीचे वालों को लगता है—आज़ाद हैं हम,
उन्हें क्या पता कितनी रातें अकेले गुज़ारते हैं,
ऊँचाई पर उड़ने वाले पंछी भी कभी-कभी,
अपने पुराने घोंसले को याद करते हैं।
कभी लौटकर उसी पेड़ को देखा हमने,
जहाँ बचपन में शाम गुज़ारी थी,
वही शाख थी, वही रास्ता था,
बस लौटने की उम्र हमारी नहीं थी।
हम चाहें भी तो लौट नहीं सकते,
वक़्त के रास्ते पीछे नहीं जाते,
जिन्होंने उड़ना सीख लिया हो एक बार,
वो टूटे हुए घोंसलों में फिर नहीं आते।
अंतिम शेर
ऊँचाई कोई शौक़ नहीं होती,
कभी-कभी मजबूरी भी होती है,
पंखों को खुला रखना पड़ता है,
क्योंकि कुछ उड़ानें ज़रूरी होती हैं।
अब छोटी शाखें बुलाती हैं तो मुस्कुरा देते हैं,
मगर दिल को वहाँ रोक नहीं पाते,
ऊँचाई पर उड़ने वाले पंछी,
छोटे-छोटे पेड़ों पर दिल नहीं लगाते।
Details
- Published
- Sep 24, 2026, 10:09 AM
- Length
- 6:31 (391 s)
- Format
- Long-form
- Category
- Music
- Audio language
- HI
- Quality
- HD
- Captions
- No
- Made for kids
- No
- Licensed content
- Yes
- Video ID
- CuvlfbBYixQ
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